ऐसे लोग बहुतेरे हैं जो अपनी उपलब्धियों का सही मूल्यांकन नहीं कर पाते और थोड़ी सफलता पाते ही अपने को बड़ा समझ बैठते हैं। उन्हें लगता है कि समाज भी उन्हें बड़ा मान रहा है और उनसे बड़ी अपेक्षाएं कर रहा है, इसलिए वे हर समय खुद को बड़ा दिखाने की कोशिश में लगे होते हैं। वे जीवन के मामूली प्रसंगों को भी काफी ऊंचाई से देखते हैं और उनकी कोई अद्भुत व्याख्या करना चाहते हैं, ऐसी कि सब चौंक उठें, वाह-वाह कर उठें।
लेकिन इस प्रयत्न में वे प्राय: असहज हो जाते हैं और कई बार हास्यास्पद भी। लेकिन जो सही अर्थों में बड़ा व्यक्ति होता है, वह छोटी-छोटी चीजों को भी काफी गंभीरता से लेता है और उनमें रमता है। वह जीवन के छोटे प्रसंगों की उपेक्षा नहीं करता और उन्हें जबर्दस्ती व्यापक आयाम देने की कोशिश भी नहीं करता। लघुता का अपना एक सौंदर्य है, उसका अपना एक सुख है। इसका बोध एक सहज व्यक्ति को ही हो सकता है। दुनिया के ज्यादातर महापुरुषों के जीवन को देखें तो हम पाएंगे कि उन्होंने हरेक क्षण को भरपूर जीना चाहा। छोटी चीजें, छोटी बातें भी बड़प्पन की कसौटी हैं।
संजय कुंदन
Tuesday, 14 April 2009
बड़प्पन का अर्थ
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1 comments:
इस आलेख से अच्छी सीख मिली है ... ऐसी बातों को हमें अमल में लाना चाहिए।
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