जब हम बुरे लोगों को अपने गलत मकसद के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते देखते हैं, तो हमें हैरत होती है। इसका एक निष्कर्ष यह है कि बुराइयां भी समय के साथ अपने को विकसित करती चलती हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो अपराधी बेहद पिछड़े हुए रह जाते और आसानी से परास्त कर दिए जाते। जिस तरह मानवता के हित में कुछ दिमाग सक्रिय हैं उसी तरह मानवता के विरोध में भी कुछ दिमाग सक्रिय हैं। दोनों तरफ एक जैसी शक्ति है एक जैसी ऊर्जा है। लेकिन मौलिकता सकारात्मक तत्वों के पास ही है।
ऐसा शायद ही कोई वैज्ञानिक आविष्कार हुआ होगा जिसकी मूल प्रेरणा गलत रही हो। किसी ने शायद ही यह सोचकर कोई मशीन बनाई होगी कि इससे वह चोरी करेगा। जो हथियार भी बनाए गए उसके पीछे एक बड़े समुदाय या राष्ट्र की रक्षा का भाव रहा। दरअसल पहले अच्छे मकसद से कोई तकनीक ईजाद की जाती है, बाद में उसका गलत इस्तेमाल होने लगता है। मतलब यह है कि सत्य और असत्य का शाश्वत संघर्ष आज भी जारी है चाहे मनुष्य कितनी ही तरक्की कर गया हो। देखना होगा कि हमारी प्रगति में कहीं कोई खोट तो नहीं कि असत्य निर्णायक रूप से पराजित नहीं हो रहा।
संजय कुंदन
Thursday, 23 April 2009
संघर्ष जारी है
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