Tuesday, 3 March 2009

सेब गिरते हैं

कुछ लोग अक्सर दलील देते हैं कि प्रारब्ध हो, तो मनुष्य की नियति और जिंदगी एक ही दिन में बदल जाती है। मिसाल : एक दिन पेड़ से सेब गिरा और न्यूटन पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का रहस्य जान गया! महात्मा बुद्ध बोधि वृक्ष के नीचे बैठे और अचानक उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई! भाग्य और नियति को स्थापित करने वाले ऐसे असंख्य उदाहरण हमारे आसपास बिखरे हो सकते हैं।

किसी व्यक्ति के जीवन में कोई एक दिन या एक लम्हा ऐसा हो सकता है, जहां से वह किसी और राह मुड़ जाता है। एकदम से दूसरे ट्रैक पर पहुंची जिंदगी की गाड़ी हो सकता है कि हमें बेहद अनूठे मुकाम पर ले जाए, पर तय है कि ऐसे सारे बदलाव अनायास नहीं होते। इसमें भाग्य नहीं होता, इसमें नियति की कोई भूमिका नहीं होती। बल्कि खुद के कर्मों का एक पूरा सिलसिला होता है, जो किसी एक दिन जाकर पूरा होता है और जिसके नतीजे में कोई बड़ी सफलता हासिल होती है या कोई बड़ा बदलाव जिंदगी में हो पाता है।

अब तक के कर्मों की जुड़ती कड़ी ही मनुष्य का उत्थान या पतन तय करती है। सेब जरूर रोज गिर सकते हैं, लेकिन उनके गिरने के सही कारण को पढ़ लेने की समझ विकसित होने में वर्षों या फिर सदियां तक लग सकती हैं।

संजय वर्मा 

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