एक समय ऐसा आता है जब हम बहुत कुछ भूलने लगते हैं। विस्मरण बढ़ती उम्र और तनाव की देन है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हम उन्हीं चीजों को भूलते हैं जिन्हें हमारा मन स्वीकार नहीं करना चाहता। असल में रोजमर्रा की जिंदगी में हम मन के विपरीत बहुत सी चीजें ओढ़ लेते हैं। हमारे जीवन में कई ऐसी अनचाही चीजें शामिल हो जाती हैं जिनसे अवचेतन में हम छुटकारा पाना चाहते हैं। इनका बोझ हमें भुलक्कड़ बना देता है। और एक दिन हम पाते हैं कि हम उन्हीं चीजों को भूलते जा रहे हैं जिन्हें हम अपने लिए सबसे आवश्यक मानते हैं। दरअसल हम जिन्हें अपने लिए आवश्यक समझ रहे होते हैं, उसे हमारा मन रिजेक्ट कर रहा होता है। यानी भूलना एक तरह से याद दिलाना भी है। विस्मरण हमें याद दिलाता है कि अपने मन की सुनो। अपने मन के मुताबिक थोड़ा तो जीकर देखो। अगर हम अपने मन की पुकार सुनें तो भूलना कम कर देंगे।
संजय कुंदन
Wednesday, 18 March 2009
भूलना मतलब याद करना
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