आदमी को जोड़ने वाली एक कड़ी है विचार। समान विचार वाले लोग एक साथ होते हैं, वे किसी समान मकसद को हासिल करने के लिए संगठित भी होते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि हमें वही पसंद आता है जो हमारे विचार को मानने वाला हो या हमसे हर बिंदु पर सहमति रखता हो। अगर ऐसा होता तो किसी खास विचारधारा को मानने वाले दल में भी कई गुट नहीं होते। यानी विचार हमें जोड़ने वाला एक सूत्र है, एकमात्र सूत्र नहीं। व्यक्ति और व्यक्ति को जोड़ने वाले अनेक तत्व होते हैं, जिन्हें पहचानना आसान नहीं है। कई बार हमारे विचार से असहमति रखने वाला आदमी हमें बेहद आकर्षित करता है। असल में हम कई चीजों को पाना चाहते हैं। हमारी इच्छाएं हमें दूसरों से जोड़ती हैं। संभव है कोई व्यक्ति सुंदर दिखना चाहता हो। अगर उसे भव्य व्यक्तित्व वाला कोई विरोधी मिलता है तो भी वह उससे प्रभावित होता है। मुमकिन है दोनों में गहरी मित्रता भी हो जाए। वहां वैचारिक असहमति से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
संजय कुंदन
Friday, 20 March 2009
असहमति से दोस्ती
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