Friday, 20 March 2009

नायक और खलनायक

अंडा और मुर्गी की तर्ज पर यह प्रश्न भी उठाया जा सकता है कि पहले नायक शब्द बना या खलनायक। वैसे ज्यादा उम्मीद है कि दोनों एक साथ प्रचलन में आए होंगे। देखा जाए तो इन दोनों में कोई खास फर्क नहीं है। जो एक समूह विशेष के लिए नायक हो सकता है वही किसी दूसरे समुदाय के लिए खलनायक भी हो सकता है। यह बात हमारे मिथकों से भी साबित होती है। अब मिथकीय चरित्र प्रमथ्यु को ही लें। कहा जाता है कि उसने स्वर्ग से आग चुराई। स्वर्ग के बाशिंदों की नजर में वह एक अपराधी था पर मानव जाति के लिए उससे बड़ा नायक और कौन होगा जिसने आग जैसी बुनियादी चीज उपलब्ध की। इस बारे में वक्त भी अपना फैसला सुनाता है। एक समय अपने देश के लिए हीरो रहा हिटलर बाद में विलेन साबित हुआ। इसका उलटा भी होता है। एक काल विशेष में खलनायक रहा आदमी एक समय के बाद जाकर नायक भी बन जाता है क्योंकि उस दौर में समाज की सोच और प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।

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