इंसान के रूप में मिले जीवन में हमें कई टारगेट पाने होते हैं। पर जो अनूठा करना चाहते हैं, जिन्हें लगता है कि जीवन सिर्फ चुनिंदा मकसद पाने के लिए नहीं बना, जिन्हें लगता है कि वे लीक से हटेंगे, तो ही कोई बात बनेगी- वे चाहें तो अनूठा काम करने के लिए दुश्मनी ही कर लें। पर इसके लिए भी एक टारगेट तय करना होगा। यह पहचान करनी होगी कि कौन होगा हमारा दुश्मन। यह तो नहीं हो सकता कि जिन दोस्तों की हमें सतत जरूरत है, हम उन्हें ही अपना दुश्मन बना लें। इसलिए यहां एक लिस्ट है, जिसमें से आप अपने मतलब का दुश्मन चुन सकते हैं- ये हैं काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, ईर्ष्या, तृष्णा और आलस्य। आप कहेंगे कि ये तो बहुत जाने-पहचाने नाम हैं, इसमें अनूठापन क्या है। पर गौर करें कि सारी जिंदगी जब भी हम अपने दुश्मन तय करते हैं, इनमें से कोई हमारे निशाने पर नहीं होता, अक्सर निशाने पर वे होते हैं जो खुद ही इनके शिकार हैं।
संजय वर्मा
Thursday, 19 March 2009
करें दुश्मनी
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3 comments:
बढ़िया है। क्रोध को चुन लिया है। उससे दुश्मनी निभाने में उसपर क्रोधित तो हुआ जा सकता है?
'post a comment' दिखता नहीं है। पहले भी खोज खोजकर खाली हाथ लौट चुकी हूँ। आज न जाने कैसे नजर पड़ गई।
घुघूती बासूती
मैं घुघूती बासूती जी की बातों से सहमत हूँ कि टिप्पणियाँ दिखाई नहीं देतीं। सुधार कर लें। आपने ठीक कहा है कि अपने दर्गुणों से दुश्मनी करें। लेकिन दिक्कत यह है कि-
अपना अवगुण नहीं देखता अजब जगत का हाल।
निज आँखों से नहीं सूझता सच है अपना भाल।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
कमेंट्स सही काम नहीं कर रहा था उसके लिए माफ़ी मांगना चाहूँगा | ब्लॉग शुरू किये कुछ ही दिन हुए है और अभी पूरी तरह सेटिंग्स नहीं हो पाई है |
अमरजीत सिंह
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