Thursday, 5 March 2009

छोटी नहीं, बड़ी

हमारी रोजाना की  दिनचर्या में ऐसी सैकड़ों चीजें और बातें शामिल हैं, जो हैं तो महत्वपूर्ण इतनी कि उनकी अनुपस्थिति हमारी दिनचर्या को बिगाड़ सकती है, पर उन पर हमारा ध्यान नहीं जाता।

अक्सर यह होता है कि उन छोटी चीजों के योगदान का हम नोटिस नहीं लेते। इस कायदे से हमें हर छोटी-छोटी बात और वस्तु की महत्ता पर गौर फरमाना चाहिए। किसी बड़ी मशीन का एक छोटा सा पुरजा भी इतनी उपयोगी भूमिका में हो सकता है। लेकिन अगर हम हर छोटी चीज पर ध्यान देंगे, तो उसी के छोटे से संसार में सिमट कर रह जाएंगे। हमारी दृष्टि उसी छोटे से दायरे में सिमट कर रह जाएगी। असल में जब हमारी नजर किसी छोटी सी चीज पर जाती है, तो वह छोटी नहीं, किसी बड़ी भूमिका में होती है। अगर कोई छोटी चीज महत्वपूर्ण है, तो असल में उस समय वह छोटी नहीं, बड़ी है। इसीलिए जब कोई चीज छोटी लगे, तो उस समय वह सचमुच छोटी और तुच्छ है और उस पर ध्यान न देना ही श्रेयस्कर है।

संजय वर्मा

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