पूरी ताकत से जलता है बुझता हुआ दीया। उसकी वह आखिरी लपट देखिए। लगता है
कि जीवन की सारी शक्ति सोखकर वह दीया उस अंतिम क्षण में, विदाई की उस
वेला में पूरे संसार को रोशन कर जाना चाहता है। जला तो वह पूरे जीवन है,
पर आखिरी वक्त में उसकी लौ में चमक कई गुना बढ़ जाती है। कहने को यह उसका
आखिरी पल है, पर इस आखिरी पल में देखिए कि कितना जीवन है, कितना स्पंदन
है। जितनी चमक पूरे जीवन में बिखेरी, शायद उतनी ही या शायद उससे ज्यादा
चमक जाते-जाते वह बिखेर जाना चाहता है। बेशक, उसका ईंधन चुक गया है, उसे
यह भी मालूम है कि हवा का कोई मामूली झोंका उसका अंत कर देगा, पर वह इन
आखिरी लम्हों को इस दुख में रीता नहीं जाने देता। वह जलता है, पूरी ताकत
से जलता है। हम मान लें कि जो यह पल है, आखिरी पल है, और तब जीएं। तब
महसूस होगा कि साधारण ढंग से जीने और पूरे जोश के साथ जीने में क्या फर्क
है।
Thursday, 19 March 2009
आखिरी क्षण
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