इस बात के लिए हमें ईश्वर का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उसने हर प्राणी को जिंदगी का लुत्फ उठाने लायक बनाया है। एक मामूली सी चींटी भी अपने ढंग से जिंदगी का मजा लेती है। यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। ऐसा नहीं है कि फूलों का मजा सिर्फ वही ले सके, जो बागों का मालिक है। फूलों का असली आनंद तो माली लेता है। शहरों में रहने वालों के पास ढेरों सुविधाएं क्यों न हों, मगर कदमों पर प्रकृति और खर्च करने को ढेर समय होने का मजा तो गांवों में रहने वाले ही लेते हैं। हर काम के साथ कोई न कोई लाभ जुड़ा ही रहता है। मंत्री जी का जितना रुतबा होता है, उनके पर्सनल असिस्टेंट का रुतबा भी उतना ही बढ़ जाता है। सब्जी उगाने वाले किसानों को रोज खेतों से ताजा तोड़ी गई सब्जी की पौष्टिकता लेने से कौन रोक सकता है। मोची क्यों नहीं अपने बच्चों के लिए शानदार जूते बनाएगा, जुलाहा अपनी प्रेमिका के लिए सुंदर वस्त्र और बढ़ई चूल्हे में खटती अपनी पत्नी को क्यों नहीं आरामदायक चौकी बनाकर देगा?
सुंदर चंद ठाकुर
Wednesday, 18 March 2009
जो जहां है, कुछ तो मजा है
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