Saturday, 21 March 2009

रहस्य का होना

दुनिया में सबसे चर्चित कथाओं में उनका शुमार होता है, जिनमें अंत तक रहस्य कायम रहता है। रहस्य से दिलचस्पी जगती है और जब तक रहस्य का तोड़ न मिल जाए, चैन नहीं आता। प्रकृति में कई रहस्य थे और हैं। इंसान उन रहस्यों का तिलिस्म तोड़ने को बेताब है। इंसान खुद भी कई रहस्य बनाता है, दूसरे लोगों को उन रहस्यों-पहेलियों को हल करने में मजा आता है। इससे लगता है कि रहस्यों का होना हमारे जीवन के लिए जरूरी है। रहस्य न होते, तो जिंदगी कितनी बेरंग और बेमजा होती। जैसे अगर बिजली हमें यूं ही मिल गई होती, तेल भंडारों को हमें खोजना नहीं पड़ता। एक क्रमिक अनुसंधान से हमने इन रहस्यों को जाना है और उनका लुत्फ उठा रहे हैं। रहस्यों को सुलझाने में एक आनंद है। पर जब हमारे ही आसपास कोई व्यक्ति आम सामाजिक व्यवहारों से अलग हटकर रहस्यमय आचरण करता है, तो वह हमारे दिमागों में खटकता है। उसके रहस्यों से हमें बेचैनी होती है। हो सकता है कि ऐसा इंसान अपनी ही पहेलियों में गुम हो, पर जरा सोचें, अगर हम खुद ही पहेली बन गए होते, तो दुनिया के रहस्यों को कौन बूझता?

संजय वर्मा

1 comments:

MAYUR said...

जीवन में खोजना एक प्रक्रिया है ,और मानव रहस्यों में उसका आनंद लेता है ,अगर ऐसा न होता तो शायद आज हम और आप चल भी नही पते क्योंकि खोजते या खड़े होने के रहस्य को जानने की कोशिश ही नही करते !

अपनी अपनी डगर