मौसम के साथ एक अजीब तोहमत हम इंसानों ने जोड़ दी है। उसे कई मौकों पर बेईमान बताया जाता है, हालांकि उसकी इस बेईमानी में कई रंग हैं और इसके आशय भी हम खुद जोड़ते हैं। जैसे अगर मौसम बेईमान है, तो जरूरी नहीं कि लू के थपेड़ों वाला मौसम हो या हाड़ कंपाने वाली ऋतु हो। बल्कि इसका मतलब हो सकता है कि मौसम बहुत खुशगवार है। यानी यह बेईमानी ऐसी है कि इसमें बेईमानी से कहीं ज्यादा शराफत झलकती है। पर गौर करें कि अगर कहा जाता कि आज मौसम बड़ा शरीफ है, तो भला कोई उसकी ईमानदारी पर यकीन करता? जाहिर है, इस बेईमानी में नेकनीयती ज्यादा है। हम हो जाएं बेईमान, क्योंकि हमें खुद से, अपनों से, गैरों से कोई ऐसा बर्ताव करना है कि दुनिया-जहान का दिल हमारी इस बेईमानी पर खुश हो ले। हम हो जाएं बेईमान, क्योंकि हमें साबित करना है कि ईमानदारी और सचाई का क्या मोल है। और ऐसे हों, कि लोग हमारी इस बेईमानी पर न्यौछावर हो जाएं। यकीन मानिए कि मौसम की तरह बेईमान होना कोई गुनाह नहीं है।
संजय वर्मा
Friday, 20 March 2009
थोड़े से बेईमान
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2 comments:
मौसम की तरह बेईमान होना कोई गुनाह नहीं है।
-सही है!
मौसम की तरह बेईमान होना अच्छा है लेकिन कितने लोग हैं जो ऐसा चाहेगें।मौसम की बेईमानी खुशियां बांटती है लेकिन हमारी बेईमानी औरों को पीडा के अतिरिक्त कुछ नहीं दे पाती है ।
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